हम साथ थे, उसे रोशनी की ज़रूरत थी उस वक्त मेरे पास मेरे सिवा और कुछ न था मैंने खुद को जलाकर उसे रोशन किया मैं जल कर रौशन हुआ और वो मेरे जलने से आज, सदियों बाद, वो रौशनी का मुजस्समा है और मैं राख का