सालों की मेहनत के बाद इस दुनिया के मैनेजर्स और चौकीदार काफ़ी हद तक उनके मुताबिक काम करने लगे हैं। दुनिया की हर क़लम पर क़ाबिज़ होने की उनकी कोशिश भी असरंदाज़ हुई हैं। जितनी कलमें उनके कब्ज़े में हैं उनकी रोशनाई में उन्होंने मासूम इंसानो के लहू मिला दिए हैं। अब ये क़लमें न तो मुहब्बत के नगमे लिखती हैं और न ही बच्चों के लिए लोरियां।
अगर आप चाहते हैं की सारी दुनिया ही उनके क़ब्ज़े में न हो, अगर आप चाहते हैं कि क़लम आज़ाद रहे, अगर आप चाहते हैं कि रोशनाई में बची रहे मोहब्बत और लोरी के गीत लिखने के तासीर ! तो फिर आपको जागना होगा ! बस आप जाग जाएँ तो फिरसे मैं गाऊंगा मोहब्बत के तराने और बच्चों की लोरियां।
Tuesday, 17 January 2017
मोहब्बत के तराने
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