Wednesday, 18 January 2017

मेहनतकशों की ठोकर

तुम पैदाइशी नंगे थे और तुम्हारे सदरे सियासत बनने तक तुम्हारे तमाम हमनवां भी नंगे हो गए। तुम पूरे तरतीब औ तफ़्तीश के साथ पैदा हुए थे लेकिन तुम्हारे जैसे कई बिना तरतीब औ तफ़्तीश के भी पैदा हुए। तुम्हारा नंगापन जैसे जैसे अहले क़लम की दुनिया का हिस्सा बना इनका नंगापन भी नुमायां होने लगा। पर अहले ज़हन ने तुम्हारे नंगेपन को तब ही देख लिया था जब तुम इस दुनिया में पैदा होने की कोशिश कर रहे थे और उनको भी जो तुम्हारे मक़बूल औ मशहूर होने के साथ अपने लिबास आहिस्ता आहिस्ता उतार रहे हैं। अहले ज़हन ये भी जानते हैं कि नंगों का कोई मुश्तकबिल नहीं है। इंसानों ने नंगेपन से लिबास तक पहुंचने में हज़ारों साल तक सफ़र किया है, अब वे फिरसे हज़ारों साल पीछे नहीं जायेंगे। तुम्हारी परेशानी ये है कि तुम अपनी रूह् हज़ारों साल पीछे छोड़ आए हो और चाहते हो की तुम्हारा ये मुर्दा जिस्म ज़िंदा इंसानो के कंधे का सहारा लेकर तुम्हारी रूह् तक पहुंचे। तो सुनो, ये मुमकिन नहीं है। सारी क़ायनात बेहतरी की तरफ़ सफ़र में है, क्या हुआ जो वक़्ती तौर पर तुम पत्थर की मानिंद रास्ते में आ गए। तुम्हारे मुर्दा जिस्मों के लिए मेहनतकशों के जूते की एक ठोकर काफ़ी है।

19 जनवरी 2017

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